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वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने कृषि निर्यात नीति के मसौदे को जारी किया

वाणिज्‍एवं उद्योग मंत्रालय ने कृषि निर्यात नीति के मसौदे को जारी किया:

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के ‘किसानों की आय दोगुनी करने’ संबंधी विजन को साकार करने के उद्देश्‍य से वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने किसानों एवं कृषि निर्यात के व्‍यापक हित में एक ‘कृषि निर्यात नीति’ का मसौदा तैयार करने की पहल की है।

वाणिज्‍य एवं उद्योग मंत्रालय ने ‘कृषि निर्यात नीति’ का मसौदा पेश किया है, जिसका उद्देश्‍य कृषि निर्यात को दोगुना करना और भारत के किसानों एवं कृषि उत्‍पादों को वैश्विक मूल्‍य श्रृंखला से एकीकृत करना है।

विभिन्‍न हितधारकों के साथ आरंभिक बैठक की गई थी, ताकि प्रस्‍तावित नीति पर उनकी प्रतिक्रिया (फीडबैक) प्राप्‍त हो सके। आरंभिक जानकारियों (इनपुट) के आधार पर एक नीतिगत दस्‍तावेज का मसौदा तैयार किया गया है।

विभिन्‍न हितधारकों की ओर से आवश्‍यक परामर्श और फीडबैक/सुझाव प्राप्‍त करने के उद्देश्‍य से कृषि निर्यात नीति के मसौदे को सार्वजनिक तौर पर उपलब्‍ध कराया गया है, ताकि इस नीति को अंतिम रूप दिया जा सके। इस पर 05 अप्रैल 2018 तक सुझाव एवं आपत्ति दर्ज करायी जा सकती है।

मसौदे के प्रमुख प्रस्ताव:

मसौदा कृषि निर्यात नीति में कहा गया है कि स्थिर कारोबारी नीति का काल, एपीएमसी अधिनियम मेंं सुधार, मंडी शुल्क को व्यवस्थित करने और पट्टे पर जमीन देने के नियम उदार बनाए जाने की जरूरत है, जिससे कि 2022 तक निर्यात दोगुना कर 60 अरब डॉलर किया जा सके।

मसौदा नीति में राज्यों की ज्यादा भागीदारी, बुनियादी ढांचे और लॉजिस्टिक्स में सुधार और नए उत्पादोंं के विकास में शोध एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन पर जोर दिया गया है।

इसमें कहा गया है कि 'राष्ट्रीय कृषि निर्यात नीति' किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य को लेकर बनाई गई है, जिससे कि कृषि निर्यात मौजूदा 30 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2022 तक 60 अरब डॉलर किया जा सके।

इसका यह भी मकसद है कि ज्यादा मूल्य और मूल्यवर्धित कृषि निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। साथ ही खराब होने वाले सामान, बाजार पर नजर रखने के लिए संस्थात्मक व्यवस्था और साफ सफाई के मसले पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया गया है।

मसौदे मेंं वैश्विक कृषि निर्यात में भारत की भागीदारी बढ़ाने और ऐसे 10 प्रमुख देशों मेंं शामिल होने का लक्ष्य रखा गया है। स्थिर कारोबारी नीति के काल को स्पष्ट करते हुए मसौदे में कहा गया है कि कुछ जिंसों के उत्पादन व घरेलू दाम में उतार चढ़ाव, महंगाई दर पर लगाम लगाने के लिए कम अवधि के लक्ष्योंं, किसानों को न्यूनतम मूल्य समर्थन मुहैया कराने और घरेलू उद्योग को संरक्षण देने की बात की गई है।

देश से इस समय चावल और मसालों का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है, इसके अलावा गेहूं और दलहन के निर्यात की भी अच्छी संभावना है। प्याज के साथ ही आलू और टमाटर तथा फलों में अंगूर, आम, केला व लीची आदि के निर्यात में बढ़ोतरी की अपार संभावना है।

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