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विश्व मानवाधिकार दिवस: 10 दिसंबर

विश्व मानवाधिकार दिवस: 10 दिसंबर

विश्व मानवाधिकार दिवस प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। 1948 में आज ही के दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पैरिस में पैले दु शेयू में वैश्विक मानवाधिकार घोषणा पत्र को अंगीकार किया था। जिसमें मानव समुदाय के लिए राष्ट्रीयता, लिंग, रंग, धर्म, भाषा और किसी भी आधार पर बिना भेदभाव किए बुनियादी अधिकार सुनिश्चित किए गए।

मानवाधिकार दिवस पर इस वर्ष मानवाधिकारों के लिए वैश्विक घोषणा की 70वीं वर्षगांठ के संबंध में साल भर तक चलने वाला अभियान शुरू किया गया है। मानवाधिकार घोषणा पत्र दुनिया का सबसे अधिक अनुवादित दस्तावेज़ है, जो 500 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है। इस अभियान का नाम #स्टैंडअप4ह्यूमनराइट्स है।

इतिहास:

व्यक्ति के मानवाधिकार और स्वंतत्रता के विचारों का उदय ब्रिटेन से ही लिया गया है। ब्रिटेन के इतिहास में 1215 का माग्ना कार्टा, 1679 का हैबियस कॉर्पस एक्ट और 1689 का बिल ऑफ राइट्स मानवाधिकार के विकास की ऐतिहासिक घटनाएं हैं।

मानवाधिकार दिवस मनाये जाने का प्रमुख कारण:

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मानव समाज को विभिन्न विकत एवं दुखद परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उसके बाद असमानता, हिंसा, भेदभाव को देखते हुए अधिकारों की जरूरत को समझकर संयुक्त राष्ट्र ने यूनिवर्सल मानव अधिकार ड्राफ्ट किया, जो 10 दिसंबर को घोषित किया गया।

इस सार्वभौमिक घोषणा के अंदर 30 अनुच्छेद हैं जो व्यक्ति के बुनियादी अधिकारों के बारे में वर्णित है। जिसके पहले ही अनुच्छेद में कहा गया है कि हर व्यक्ति को जन्म से ही स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है।

मानवाधिकार का ड्राफ्ट औपचारिक रूप से 4 दिसंबर 1950 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के पूर्ण अधिवेशन में लाया गया, जिसके तहत महासभा ने प्रस्ताव 423 (वी) को घोषित कर सभी देशों और संगठनों को अपने-अपने तरीके से मनाने के लिए कहा गया।

भारत और मानवाधिकार:

इस दिन मानव अधिकार के मुद्दों पर कई बड़ी राजनीतिक विमर्श, बैठक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। बता दें कि 10 दिसंबर को ही मानव अधिकार के क्षेत्र में संयुक्त राष्ट्र का पंचवर्षीय और नोबेल पुरस्कार दिया जाता है।

भारत में भी 28 सितंबर 1993 से मानव अधिकार कानून को लागू किया गया और 12 अक्टूबर 1993 को 'राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग' का गठन हुआ।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 19, 20, 21, 23, 24, 39, 43, 45 के तहत देश के अंदर मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की गई है। संविधान किसी भी व्यक्ति के मानव अधिकारों का हनन होने पर सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक उपचार का अधिकार भी देता है।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के कार्य क्षेत्र के अंतर्गत बाल मजदूरी, एचआईवी/एड्स, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार, हिरासत और मुठभेड़ में होने वाली मौत, अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकार आदि आते हैं। भारत मे ही नही बल्की विश्व में कई एनजीओ भी काम कर रहे हैं और साथ ही कुछ समाजसेवी लोग भी इस दिशा में अकेले ही अपनी मुहिम चला रहे हैं।

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